
इमानुएल भारद्वाज की रिपोर्ट

1 जनवरी को दुनिया न्यू ईयर मानती है ना लेकिन कुछ लोग इस दिन जीत का जश्न नहीं अपनी पहचान को कोई याद करते हैं
मैं बात कर रहा हूं कोरेगांव की आज से 200 साल पहले कुछ लोगों को जीने का हक नहीं था पानी पर रोक इज्जत पर लात अगर आवाज उठाई ना तो जिंदा रहना मुश्किल है
1 जनवरी 1818 को लोग खड़े हुए ना राज्य न सेना उसके साथ था बस हिम्मत थी सिर्फ 540 दलित सैनिक और 28000 पेशवा फौज
वही 500 दलित 28000 से लड़ गए भूखे पेट थके हुए थे पर झुकने को तैयार नहीं थे
और शाम होते होते इतिहास बदल गया वह एक सिर्फ एक जंग नहीं था जहां पहली बार दलित ने कहा हम भी इंसान हैं इसलिए कोरेगांव एक गांव नहीं एक चीख है अब और नहीं जब कोई इतिहास को जलाने की कोशिश करता है तो समझ लेना वह डरता है
जो जग गया है उसे दबाया नहीं जाता 1 जनवरी सिर्फ डेट नहीं है सब कुछ छीन लिया जाता है पर भी दलित झुकता नहीं लड़ता है इसलिए बोलो जय भीम ताकि बाबा साहब जिंदा रहे जय भीम जय संविधान












